इन पांच कारणों से हर भारतीय को MS Dhoni का करना चाहिए सम्मान


Mayank Kumar

हरिवंश राय बच्चन की एक बहुत पुरानी कविता है, 'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की हार नहीं होती', इस कविता की पंक्ति ने इस बात को साबित कर दिया कि इंसान मेहनत और लगन से हर वो मुकाम हासिल कर सकता है, जिसे पाने का वो सपना देखता है।  

हरिवंश राय बच्चन की ये कविता टीम इंडिया के पूर्व कप्तान Mahendra Singh Dhoni पर भी सटीक बैठती है। Dhoni ने अपनी मेहनत और लगन से हर उस मुकाम को हासिल किया, जिसे पाने का सपना हर खिलाड़ी के साथ-साथ, एक आम इंसान भी देखता है। ‘कैप्टन कूल’ कहे जाने वाले Dhoni एक बेहतरीन क्रिकेटर के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी हैं। किसी ने इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि एक छोटे से शहर से निकलकर ये लड़का पूरी दुनिया में भारत के साथ-साथ अपना नाम भी रोशन करेगा। लेकिन कहते हैं ना अगर आपके सपने में, मिशन और उस मिशन में विजन शामिल हो, तो आपका हर सपना हकीकत में बदल सकता है, बस आपको हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क करने की जरूरत है। 

Dhoni ने दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश करते हुए ये बता दिया कि अगर हम खुद पर भरोसा करें तो भगवान भी हमारे साथ खड़े होते हैं और शायद यही वजह है कि क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने Dhoni की प्रशंसा में कहा था कि Dhoni एक बेहतरीन कप्तान हैं,जिनकी कप्तानी में वो खेले। वहीं, भारतीय टीम के वर्तमान कप्तान विराट कोहली ने कहा है कि मैं आपके सामने अपना सर झुकाता हूँ। सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी क्रिकेटर Dhoni का दिल से सम्मान करते हैं। 

पिछले आर्टिकल में हमने आपको बताया था कि आखिर क्यों भारतीय फैंस Dhoni की आलोचना करते हैं लेकिन आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों हर भारतीय को Dhoni का दिल से सम्मान करना चाहिए। अगर आप Dhoni के फैन हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए है। तो चलिए शुरू करते हैं, Dhoni के सम्मान के कहानी की।

धोनी ने मेहनत से हासिल की सफलता

MS Dhoni ने अपनी ज़िंदगी में सफलता कैसे हासिल की, ये बात हम नहीं जान पाते, अगर साल 2016 में Dhoni की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ हमारे सामने नहीं आई होती। उस फिल्म में Dhoni का किरदार निभाने वाले सुशांत सिंह राजपूत के जरिए फैंस को ये पता चला था कि शुरुआत में Dhoni इतने सफल नहीं थे, जितने की आज हैं। इस सफलता के लिए Dhoni ने काफी मेहनत की। क्रिकेट का कोई भी फॉर्मेट हो, चाहे वो वनडे हो, टी20 हो, टेस्ट क्रिकेट हो या आईपीएल हो, हर जगह Dhoni ने अपनी छाप छोड़ी। अपनी कप्तानी में Dhoni ने भारत को पहली बार टी20 विश्व कप में विजेता बनाया, फिर 28 साल के बाद Dhoni की कप्तानी में भारत ने वनडे विश्व कप जीता तो वहीं, भारत ने Dhoni की कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया जबकि आईपीएल में Dhoni अपनी टीम सीएसके को 3 बार चैंपियन बना चुके हैं। क्रिकेट जगत में तमाम खिलाड़ी आएंगे और जाएंगे लेकिन Dhoni जैसा खिलाड़ी भारत को फिर मिलना असंभव सा लगता है। 

विवादों से दूर-दूर तक नाता नहीं

क्रिकेट जगत में हमें कई बार विवाद देखने की मिले हैं। खिलाड़ियों को आपस में भिड़ते देखा है‌, खिलाड़ी को अंपायर से उलझते देखा है और खिलाड़ियों को फैंस से भी उलझते देखा है लेकिन Mahendra Singh Dhoni ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका विवादों से दूर-दूर तक नाता नहीं है। हालांकि, कई बार Dhoni को विवादों में खींचने की कोशिश की गयी, फिर वो सौरव गांगुली से विवाद हो, वीरेंद्र सहवाग से विवाद हो या युवराज सिंह से विवाद हो। यहां तक कि Dhoni के नाम को बीसीसीआई के चीफ रह चुके एन श्रीनिवासन और आईपीएल में उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स के विवादों के साथ भी उनका नाम जोड़ने की कोशिश की गई लेकिन इन सबके बावजूद भी Dhoni इन सारे विवादों को दरकिनार कर आगे निकल गए। शायद Dhoni जानते थे कि अगर वो किसी विवाद में पड़े तो उनके साथ-साथ भारतीय टीम की छवि पर दाग लगने शुरू हो जाएंगे और यही वजह है कि Dhoni ने कभी किसी विवाद में फंसने की कोशिश नहीं की।  

बिना किसी इच्छा के संभाली टीम की कमान

Mahendra Singh Dhoni ने अपने करियर में हमेशा निस्वार्थ कप्तानी की और ये उनकी सबसे बड़ी खूबी है। Dhoni जब तक खेले, तब तक उन्होंने कभी भी किसी निश्चित क्रम पर बल्लेबाजी नहीं की। जहां - जहां टीम को जरूरत हुई, Dhoni ने उस नंबर पर आकर बल्लेबाजी की और शानदार प्रदर्शन किया। बिना किसी स्वार्थ के Dhoni ने युवा खिलाड़ियों को मौका दिया। इन्हीं में से एक खिलाड़ी का नाम है, रोहित शर्मा। ये कहना गलत नहीं होगा कि रोहित आज जिस मुकाम तक पहुंचे हैं, उसमें Dhoni का बहुत बड़ा हाथ है। रोहित शर्मा पहले निचले क्रम में बल्लेबाजी करते थे लेकिन ये MS Dhoni ही थे जिन्होंने रोहित शर्मा को बतौर सलामी बल्लेबाज टीम में मौका दिया और आज रोहित शर्मा हर बड़े - बड़े रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करते जा रहे हैं। 

धोनी के लिए देश प्रेम सबसे पहले

MS Dhoni का देश प्रेम किसी से छुपा नहीं है। कई मौकों पर Dhoni ने इसे साबित भी किया है। Dhoni ने इस बात को साबित किया है कि देश प्रेम सबसे ऊपर है। यहां तक कि Dhoni जब पिता बनने वाले थे तब उन्होंने 2015 के विश्व कप में टीम के प्रति जिम्मेदारी को निभाना जरूरी समझा। 2011 में भारत को विश्व विजेता बनाने के बाद Dhoni को बड़े सम्मान से नवाजा गया। Dhoni को भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद रैंक से नवाजा। अक्सर कई मौकों पर Dhoni ने खुद कहा है कि अगर वो क्रिकेटर नहीं होते तो फौजी बनाकर देश की सेवा करते। साल 2018 में Dhoni को जब पद्म भूषण के सम्मान से नवाजा गया तो उन्होंने उस सम्मान को सेना की वर्दी में ग्रहण किया। इसको लेकर Dhoni से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आर्मी की यूनिफॉर्म में इस सम्मान को हासिल करना, इस खुशी को दस गुना बढ़ा देता है।

सत्ता प्रेमी नहीं थे धोनी

Mahendra Singh Dhoni उन कप्तानों में से थे जिन्हे सत्ता का लोभ कभी नहीं था और शायद अपनी सफलताओं की वजह से Dhoni इतने लंबे समय तक भारतीय टीम के कप्तान बने रहे। क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में अपनी कप्तानी से रिटायरमेंट के बाद Dhoni ने कहा था कि ‘उन्होंने विराट कोहली के एक कप्तान के तौर पर तैयार होने का इन्तजार किया और उसके बाद रिटायरमेंट लिया'। आज के समय में लोग मारते दम तक कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ एमएस Dhoni हैं जो अपने नेतृत्व में युवा खिलाड़ियों को मौका देते हैं। भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ते समय Dhoni ने ये कहा था कि उनकी ये इच्छा है कि वो विराट कोहली की कप्तानी में विश्व कप 2019 का मुकाबला खेले। शायद Dhoni की सोच यही थी कि अगर वो पहले कप्तानी छोड़ते हैं तो नए कप्तान को तैयारी करने का भरपूर समय मिलेगा। 

तो देखा आपने ये थे वो पांच कारण जिसकी वजह से हर भारतीय को MS Dhoni का सम्मान करना चाहिए। Dhoni के यही गुण उन्हें महान बनाते हैं। हालांकि, धोनी अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं लेकिन फैंस के लिए खुशी की बात ये है कि वो फिलहाल आईपीएल में खेलते हुए नजर आएंगे। 

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